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बिहार पेंशनधारियों के लिए बड़ा अलर्ट, 30 मई तक Life Certification नहीं कराया तो रुक सकती है पेंशन

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बिहार सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशनधारियों से 30 मई तक जीवन प्रमाणीकरण कराने की अपील की है। Dr. Shweta Gupta ने कहा कि समय पर लाइफ सर्टिफिकेशन नहीं कराने पर पेंशन प्रभावित हो सकती है।

पटना/आलम की खबर:बिहार सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशनधारियों के लिए महत्वपूर्ण चेतावनी जारी करते हुए साफ किया है कि समय पर जीवन प्रमाणीकरण यानी लाइफ सर्टिफिकेशन नहीं कराने पर पेंशन भुगतान प्रभावित हो सकता है। समाज कल्याण विभाग ने राज्यभर के पेंशनधारियों से 30 मई तक हर हाल में यह प्रक्रिया पूरी करने की अपील की है। सरकार का कहना है कि जिन लाभुकों का जीवन प्रमाणीकरण लंबित रहेगा, उनकी पेंशन अस्थायी रूप से रोकी जा सकती है।

बुधवार को समाज कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान विभागीय योजनाओं की प्रगति और मॉनिटरिंग व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता कर रहीं Dr. Shweta Gupta ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि राज्य के सभी पात्र पेंशनधारियों का जीवन प्रमाणीकरण तय समय सीमा के भीतर पूरा कराया जाए। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया पेंशन व्यवस्था को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है।

विभागीय आंकड़ों के अनुसार अब तक लगभग 91 लाख 25 हजार पेंशनधारी अपना जीवन प्रमाणीकरण करा चुके हैं। हालांकि अभी भी बड़ी संख्या में ऐसे लाभुक हैं, जिन्होंने यह प्रक्रिया पूरी नहीं की है। सरकार ने ऐसे सभी लाभार्थियों से जल्द से जल्द पंचायत स्तरीय शिविरों या नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर निशुल्क लाइफ सर्टिफिकेशन कराने की अपील की है।

सरकार का कहना है कि जीवन प्रमाणीकरण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पेंशन राशि सही और पात्र लाभार्थियों तक ही पहुंचे। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत वृद्धजन, विधवा महिलाएं, दिव्यांग, कुष्ठ पीड़ित और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को हर महीने आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। ऐसे में लाभार्थियों का नियमित सत्यापन जरूरी माना जाता है ताकि किसी प्रकार की गड़बड़ी या फर्जी भुगतान को रोका जा सके।

बैठक के दौरान मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अधिक से अधिक लोगों तक जानकारी पहुंचाने के लिए प्रचार-प्रसार अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा कि कई ग्रामीण इलाकों में अभी भी लोगों को प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं मिल पाती है। ऐसे में पंचायत स्तर पर विशेष शिविरों के आयोजन और स्थानीय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से यह भी कहा कि किसी भी पात्र लाभार्थी को जानकारी के अभाव में पेंशन से वंचित नहीं होना चाहिए।

समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों के अनुसार जीवन प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह निशुल्क है। लाभार्थी अपने आधार कार्ड और अन्य आवश्यक दस्तावेजों के साथ नजदीकी CSC केंद्र या पंचायत शिविर में जाकर यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। कई जिलों में मोबाइल कैंप भी लगाए जा रहे हैं ताकि बुजुर्ग और दिव्यांग लाभार्थियों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

बैठक में विभाग द्वारा संचालित केंद्र प्रायोजित और राज्य स्तरीय योजनाओं की समीक्षा भी की गई। अधिकारियों ने बताया कि राज्य में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के माध्यम से करोड़ों जरूरतमंद लोगों को आर्थिक सहायता दी जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि योजनाओं का लाभ पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से सभी पात्र लोगों तक पहुंचे।

Dr. Shweta Gupta ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा योजनाएं गरीब और कमजोर वर्गों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। वृद्धजन, दिव्यांग, विधवा महिलाएं और अन्य जरूरतमंद लोग इन योजनाओं पर काफी हद तक निर्भर रहते हैं। ऐसे में यह सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है कि उन्हें समय पर सहायता मिलती रहे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि योजनाओं की निगरानी लगातार की जाए और जमीनी स्तर पर बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए।

विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल सत्यापन और जीवन प्रमाणीकरण जैसी प्रक्रियाएं सरकारी योजनाओं को अधिक पारदर्शी बनाने में मदद करती हैं। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी जानकारी की कमी और इंटरनेट समस्याओं के कारण कई बार लोगों को परेशानी भी होती है। ऐसे में प्रशासन के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वह स्थानीय स्तर पर लोगों की सहायता सुनिश्चित करे।

राज्य सरकार की ओर से लगातार यह प्रयास किया जा रहा है कि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में किसी तरह की गड़बड़ी न हो और वास्तविक लाभार्थियों तक सहायता पहुंचे। जीवन प्रमाणीकरण को इसी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यदि कोई लाभार्थी समय पर प्रमाणन नहीं कराता है, तो तकनीकी कारणों से उसकी पेंशन भुगतान प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

ग्रामीण इलाकों में कई पंचायत प्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता भी लोगों को जागरूक करने में जुटे हैं। पंचायत भवनों और CSC केंद्रों पर लोगों की भीड़ बढ़ने लगी है। कई जगहों पर बुजुर्ग लाभार्थियों को स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय प्रशासन की मदद से केंद्रों तक पहुंचाया जा रहा है।

फिलहाल सरकार की प्राथमिकता यही है कि 30 मई की तय समय सीमा से पहले अधिकतम पेंशनधारी जीवन प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पूरी कर लें। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि सरकार और प्रशासन इस अभियान को कितनी प्रभावी तरीके से जमीन पर लागू कर पाते हैं।

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